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mahabharat 1.25.6: पक्षीराज गरुड़ सूर्य के निकट आकाश में विचरण करने लगे, जिससे सर्प सूर्य की किरणों से पीड़ित होकर अचेत हो गए।   |   mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.25.6 
स सूर्यमभितो याति वैनतेयो विहंगम:।
सूर्यरश्मिप्रतप्ताश्च मूर्च्छिता: पन्नगाभवन्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
पक्षीराज गरुड़ सूर्य के निकट आकाश में विचरण करने लगे, जिससे सर्प सूर्य की किरणों से पीड़ित होकर अचेत हो गए।
 
The king of birds Garuda started walking in the sky near the Sun. Therefore, the snakes were tormented by the rays of the Sun and fell unconscious. 6.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)