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mahabharat 1.25.5: तब गरुड़ की माता विनता सर्पों की माता कद्रू को अपनी पीठ पर उठाकर ले जाने लगीं। उधर माता की आज्ञा से गरुड़ ने भी सर्पों को अपनी पीठ पर उठा लिया।   |   mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.25.5 
तत: सुपर्णमाता तामवहत् सर्पमातरम्।
पन्नगान् गरुडश्चापि मातुर्वचनचोदित:॥ ५॥
 
 
अनुवाद
तब गरुड़ की माता विनता सर्पों की माता कद्रू को अपनी पीठ पर उठाकर ले जाने लगीं। उधर माता की आज्ञा से गरुड़ ने भी सर्पों को अपनी पीठ पर उठा लिया।
 
Then Garuda's mother Vinata began to carry Kadru, the mother of snakes, on her back. On the other hand, by the mother's order, Garuda also took the snakes on his back. 5.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)