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mahabharat 1.25.3: एक दिन कद्रू ने अपने पुत्र के पास बैठी हुई विनीत विनता को बुलाकर उससे यह कहा -॥3॥   |   mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.25.3 
तत: कदाचिद् विनतां प्रणतां पुत्रसंनिधौ।
काले चाहूय वचनं कद्रूरिदमभाषत॥ ३॥
 
 
अनुवाद
एक दिन कद्रू ने अपने पुत्र के पास बैठी हुई विनीत विनता को बुलाकर उससे यह कहा -॥3॥
 
One day Kadru called the humble Vinata who was sitting near her son and said this to her -॥ 3॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)