Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.25.15: 'आप पर्वतों और वनों से युक्त परम सुन्दरी हैं, आप अंधकार से रहित आकाश और सूर्य हैं। आप मेघों और बादलों से युक्त, अनेक मगरमच्छों और मछलियों से युक्त और उत्ताल तरंगों से सुशोभित समुद्र भी हैं। 15॥ | mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
'आप पर्वतों और वनों से युक्त परम सुन्दरी हैं, आप अंधकार से रहित आकाश और सूर्य हैं। आप मेघों और बादलों से युक्त, अनेक मगरमच्छों और मछलियों से युक्त और उत्ताल तरंगों से सुशोभित समुद्र भी हैं। 15॥
'You are the perfect beauty with mountains and forests and you are the sky without darkness and the sun. You are also the ocean full of clouds and clouds, filled with many crocodiles and fishes and adorned with surging waves. 15॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥