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mahabharat 1.25.12: आप ही समस्त प्राणियों के प्रकाश हैं। आप ही सूर्य और अग्नि भी हैं। आप ही अद्भुत, महान भूत हैं, आप ही राजा हैं और देवताओं में श्रेष्ठ हैं। 12॥   |   mahabharat अध्याय 1.25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 25: सूर्यके तापसे मूर् च् छत हुए सर्पोंकी रक्षाके लिये कद्रूद्वारा इन्द्रदेवकी स्तुति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.25.12 
त्वं ज्योति: सर्वभूतानां त्वमादित्यो विभावसु:।
त्वं महद्‍भूतमाश्चर्यं त्वं राजा त्वं सुरोत्तम:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
आप ही समस्त प्राणियों के प्रकाश हैं। आप ही सूर्य और अग्नि भी हैं। आप ही अद्भुत, महान भूत हैं, आप ही राजा हैं और देवताओं में श्रेष्ठ हैं। 12॥
 
‘You are the light of all living beings. You are also the sun and fire. You are a wonderful, great ghost, you are a king and you are the best among the gods. 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)