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mahabharat 1.24.9: ‘संकट के समय मुझे कोई सहायक नहीं मिलता। देवता भी जब मुझे राहु से पीड़ित देखते हैं, तब चुपचाप सहन कर लेते हैं।॥9॥   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  1.24.9 
सहाय एव कार्येषु न च कृच्छ्रेषु दृश्यते।
पश्यन्ति ग्रस्यमानं मां सहन्ते वै दिवौकस:॥ ९॥
 
 
अनुवाद
‘संकट के समय मुझे कोई सहायक नहीं मिलता। देवता भी जब मुझे राहु से पीड़ित देखते हैं, तब चुपचाप सहन कर लेते हैं।॥9॥
 
‘In times of crisis, I do not find anyone to help me. Even when the gods see me suffering from Rahu, they tolerate it silently.॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)