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mahabharat 1.24.4-5h: जब सूर्य ने अपने भयंकर तेज से समस्त लोकों को भस्म करने का निश्चय किया, तब गरुड़ ने पुनः महान तेज अरुण को पूर्व दिशा में लाकर सूर्य के निकट स्थापित कर दिया।   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 4-5h
 
 
श्लोक  1.24.4-5h 
तत्रारुणश्च निक्षिप्तो दिशं पूर्वां महाद्युति:॥ ४॥
सूर्यस्तेजोभिरत्युग्रैर्लोकान् दग्धुमना यदा।
 
 
अनुवाद
जब सूर्य ने अपने भयंकर तेज से समस्त लोकों को भस्म करने का निश्चय किया, तब गरुड़ ने पुनः महान तेज अरुण को पूर्व दिशा में लाकर सूर्य के निकट स्थापित कर दिया।
 
When the Sun decided to burn down all the worlds with his dreadful brilliance, Garuda again brought the great brilliance Aruna to the east and placed him near the Sun. 4 1/2
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)