Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.24.3-4h: उग्रश्रवाजी कहते हैं - तत्पश्चात अपनी इच्छानुसार चलने वाला और इच्छानुसार पराक्रम दिखाने वाला पक्षी गरुड़ अपने भाई अरुण को पीठ पर बिठाकर अपने पिता के घर से समुद्र के उस पार अपनी माता के पास आया।   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 3-4h
 
 
श्लोक  1.24.3-4h 
सौतिरुवाच
तत: कामगम: पक्षी कामवीर्यो विहंगम:।
अरुणं चात्मन: पृष्ठमारोप्य स पितुर्गृहात्॥ ३॥
मातुरन्तिकमागच्छत् परं तीरं महोदधे:।
 
 
अनुवाद
उग्रश्रवाजी कहते हैं - तत्पश्चात अपनी इच्छानुसार चलने वाला और इच्छानुसार पराक्रम दिखाने वाला पक्षी गरुड़ अपने भाई अरुण को पीठ पर बिठाकर अपने पिता के घर से समुद्र के उस पार अपनी माता के पास आया।
 
Ugrasravaji says - Thereafter the bird Garuda, who moves according to his will and displays valour as per his liking, carrying his brother Arun on his back, came from his father's home to his mother on the other shore of the ocean. 3 1/2.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)