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mahabharat 1.24.20: इस प्रसंग में यह भी स्पष्ट हो गया है कि महाबली अरुण ने सूर्य का सारथि क्यों कार्य किया। अब अपने दूसरे प्रश्न का उत्तर पुनः सुनिए।   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.24.20 
अरुणश्च यथैवास्य सारथ्यमकरोत् प्रभु:।
भूय एवापरं प्रश्नं शृणु पूर्वमुदाहृतम्॥ २०॥
 
 
अनुवाद
इस प्रसंग में यह भी स्पष्ट हो गया है कि महाबली अरुण ने सूर्य का सारथि क्यों कार्य किया। अब अपने दूसरे प्रश्न का उत्तर पुनः सुनिए।
 
Why the powerful Aruna acted as the charioteer of the Sun has also become clear in this context. Now listen to the answer to your second question again.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे चतुर्विंशोऽध्याय:॥ २४॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक चौबीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २४॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)