Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.24.17-18h: उनका शरीर विशाल है। वे अत्यंत तेजस्वी हैं। वे सूर्य के आगे रथ पर बैठेंगे। वे उनके सारथी का कार्य करेंगे और उनका तेज भी चुरा लेंगे। ऐसा करने से समस्त लोकों, ऋषियों और देवताओं का भी कल्याण होगा। ॥17 1/2॥ | mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
महाकायो महातेजा: स स्थास्यति पुरो रवे:।
करिष्यति च सारथ्यं तेजश्चास्य हरिष्यति॥ १७॥
लोकानां स्वस्ति चैवं स्याद् ऋषीणां च दिवौकसाम्।
अनुवाद
उनका शरीर विशाल है। वे अत्यंत तेजस्वी हैं। वे सूर्य के आगे रथ पर बैठेंगे। वे उनके सारथी का कार्य करेंगे और उनका तेज भी चुरा लेंगे। ऐसा करने से समस्त लोकों, ऋषियों और देवताओं का भी कल्याण होगा। ॥17 1/2॥
His body is huge. He is extremely radiant. He will sit in the chariot in front of the Sun. He will act as his charioteer and will also steal his radiance. By doing this, all the worlds, sages and gods will also be benefited. ॥17 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥