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mahabharat 1.24.15: ब्रह्माजी बोले - ये सूर्यदेव आज ही सम्पूर्ण जगत् का नाश करने को तत्पर हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दृष्टि में आते ही ये सम्पूर्ण लोकों को भस्म कर देंगे॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.24.15 
पितामह उवाच
एष लोकविनाशाय रविरुद्यन्तुमुद्यत:।
दृश्यन्नेव हि लोकान् स भस्मराशीकरिष्यति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
ब्रह्माजी बोले - ये सूर्यदेव आज ही सम्पूर्ण जगत् का नाश करने को तत्पर हैं। ऐसा प्रतीत होता है कि दृष्टि में आते ही ये सम्पूर्ण लोकों को भस्म कर देंगे॥15॥
 
Brahmaji said – This Sun God wants to be ready to destroy the entire world today. It seems that as soon as they come into sight, they will incinerate entire worlds. 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)