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mahabharat 1.24.12: ‘देवताओं! आज मध्य रात्रि के समय एक महान अग्नि उत्पन्न होगी, जो सम्पूर्ण लोकों को भयभीत कर देगी और तीनों लोकों को नष्ट कर सकती है।’॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.24.12 
अद्यार्धरात्रसमये सर्वलोकभयावह:।
उत्पत्स्यते महान् दाहस्त्रैलोक्यस्य विनाशन:॥ १२॥
 
 
अनुवाद
‘देवताओं! आज मध्य रात्रि के समय एक महान अग्नि उत्पन्न होगी, जो सम्पूर्ण लोकों को भयभीत कर देगी और तीनों लोकों को नष्ट कर सकती है।’॥12॥
 
'Gods! Today at midnight a great fire will occur which will frighten all the worlds and can destroy all the three worlds.'॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)