Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.24.10: ‘अतः सम्पूर्ण जगत् का संहार करने के लिए मैं निःसंदेह अस्ताचल पर जाकर वहीं निवास करूँगा।’ ऐसा निश्चय करके सूर्यदेव अस्ताचल पर चले गए॥10॥   |   mahabharat अध्याय 1.24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 24: गरुडके द्वारा अपने तेज और शरीरका संकोच तथा सूर्यके क्रोधजनित तीव्र तेजकी शान्तिके लिये अरुणका उनके रथपर स्थित होना  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  1.24.10 
तस्माल्लोकविनाशार्थं ह्यवतिष्ठे न संशय:।
एवं कृतमति: सूर्यो ह्यस्तमभ्यगमद् गिरिम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
‘अतः सम्पूर्ण जगत् का संहार करने के लिए मैं निःसंदेह अस्ताचल पर जाकर वहीं निवास करूँगा।’ ऐसा निश्चय करके सूर्यदेव अस्ताचल पर चले गए॥10॥
 
'Therefore, in order to destroy the entire world, I will undoubtedly go to Astachal and stay there.' Having decided this, Suryadev went to Astachal. 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)