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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.233.6 
वसामेदोवहा: कुल्यास्तत्र पीत्वा च पावक:।
जगाम परमां तृप्तिं दर्शयामास चार्जुनम्॥ ६॥
 
 
अनुवाद
वहाँ मज्जा और चर्बी की अनेक नदियाँ बह रही थीं, जिन्हें पीकर अग्निदेव पूर्णतया तृप्त हो गए और फिर अर्जुन के समक्ष प्रकट हुए।
 
There many rivers of marrow and fat flowed and after drinking them all Agnidev became completely satiated. After that he appeared before Arjun.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)