Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.233.3: हे बालकों! तुम्हें अपने मन में मेरे प्रति कोई द्वेष नहीं रखना चाहिए। तुम ऋषि हो, अग्निदेव भी यह जानते हैं; क्योंकि तुमने ब्रह्मतत्त्व को जान लिया है। | mahabharat अध्याय 1.233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न संतापो हि व: कार्य: पुत्रका हृदि मां प्रति।
ऋषीन् वेद हुताशोऽपि ब्रह्म तद् विदितं च व:॥ ३॥
अनुवाद
हे बालकों! तुम्हें अपने मन में मेरे प्रति कोई द्वेष नहीं रखना चाहिए। तुम ऋषि हो, अग्निदेव भी यह जानते हैं; क्योंकि तुमने ब्रह्मतत्त्व को जान लिया है।
Children! You should not hold any grudge against me in your heart. You are sages, even Agnidev knows this; because you have realized the essence of Brahman. 3.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥