Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.233.2: अग्निदेव के कहे हुए वचनों को स्मरण करके, तुम्हारी माता के धर्म-ज्ञान को जानकर तथा तुममें भी महान् बल है, यह जानकर मैं पहले यहाँ नहीं आया।॥ 2॥ | mahabharat अध्याय 1.233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अग्नेर्वचनमाज्ञाय मातुर्धर्मज्ञतां च व:।
भवतां च परं वीर्यं पूर्वं नाहमिहागत:॥ २॥
अनुवाद
अग्निदेव के कहे हुए वचनों को स्मरण करके, तुम्हारी माता के धर्म-ज्ञान को जानकर तथा तुममें भी महान् बल है, यह जानकर मैं पहले यहाँ नहीं आया।॥ 2॥
Remembering the words given by Agni, knowing about your mother's knowledge of Dharma and realizing that you too possess great power, I did not come here earlier.॥ 2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥