भरतश्रेष्ठ! महात्मा अग्निदेव के इस आदेश पर अर्जुन, श्रीकृष्ण और मयासुर तीनों ने उनकी परिक्रमा की। फिर वे तीनों यमुना नदी के सुन्दर तट पर जाकर एक साथ बैठ गए॥18-19॥
Bharatshrestha! On this order of Mahatma Agnidev, Arjun, Shri Krishna and Mayasur all circled around him. Then all three of them went to the beautiful banks of river Yamuna and sat together. 18-19॥
इति श्रीमहाभारते शतसाहस्रॺां संहितायां वैयासिक्यामादिपर्वणि मयदर्शनपर्वणि वरप्रदाने त्रयस्त्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारतमें व्यासनिर्मित एक लाख श्लोकोंकी संहिताके अंतर्गत आदिपर्वके मयदर्शनपर्वमें इन्द्रवरदानविषयक दो सौ तैंतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३३॥
(आदिपर्व सम्पूर्णम्) आदिपर्व की पूर्ण श्लोक संख्या-९६२६ १/२
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥