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mahabharat 1.233.15: मृगों और पक्षियोंसहित सम्पूर्ण वन को जलाकर अग्निदेव भी पूर्णतया तृप्त हो गए और छः दिन तक विश्राम किया॥15॥   |   mahabharat अध्याय 1.233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  1.233.15 
पावकश्च तदा दावं दग्ध्वा समृगपक्षिणम्।
अहानि पञ्च चैकं च विरराम सुतर्पित:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
मृगों और पक्षियोंसहित सम्पूर्ण वन को जलाकर अग्निदेव भी पूर्णतया तृप्त हो गए और छः दिन तक विश्राम किया॥15॥
 
Having burnt the entire forest along with the deer and birds, Agni Deva too was completely satiated and rested for six days.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)