Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.233.13: भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही वर माँगा कि अर्जुन के साथ मेरा प्रेम निरन्तर बढ़ता रहे। इन्द्र ने परम बुद्धिमान श्रीकृष्ण को वह वर दे दिया॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 233: इन्द्रदेवका श्रीकृष्ण और अर्जुनको वरदान तथा श्रीकृष्ण, अर्जुन और मयासुरका अग्निसे विदा लेकर एक साथ यमुनातटपर बैठना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.233.13 
वासुदेवोऽपि जग्राह प्रीतिं पार्थेन शाश्वतीम्।
ददौ सुरपतिश्चैव वरं कृष्णाय धीमते॥ १३॥
 
 
अनुवाद
भगवान श्रीकृष्ण ने भी यही वर माँगा कि अर्जुन के साथ मेरा प्रेम निरन्तर बढ़ता रहे। इन्द्र ने परम बुद्धिमान श्रीकृष्ण को वह वर दे दिया॥13॥
 
Lord Shri Krishna also asked for this boon that my love with Arjun should continue to grow. Indra gave that boon to the most intelligent Shri Krishna. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)