| श्री महाभारत » पर्व 1: आदि पर्व » अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना » श्लोक 7 |
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| | | | श्लोक 1.232.7  | लालप्यमानं तमृषिं मन्दपालं तथा वने।
लपिता प्रत्युवाचेदं सासूयमिव भारत॥ ७॥ | | | | | | अनुवाद | | भरत! जब मण्डपाल ऋषि वन में (अपनी स्त्री और पुत्रों के लिए) इस प्रकार विलाप कर रहे थे, तब लपिता ने ईर्ष्यापूर्वक कहा -॥7॥ | | | | Bhaarata! When the sage Mandapala was thus lamenting in the forest (for his wife and children), Lapita said jealously -॥ 7॥ | | ✨ ai-generated | | |
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