श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.232.6 
जरितारि: कथं पुत्र: सारिसृक्‍क: कथं च मे।
स्तम्बमित्र: कथं द्रोण: कथं सा च तपस्विनी॥ ६॥
 
 
अनुवाद
'मेरा पुत्र जरीतारि कैसा होगा, सरिसृक की क्या स्थिति होगी, स्तम्भमित्र और द्रोण कैसे होंगे? तथा उस तपस्वी जरीता की क्या स्थिति होगी?'॥6॥
 
'How will my son Jaritari be, what will be the state of Sārisṛkka, how will Stambamitra and Drona be? And what will be the state of that ascetic Jaritā?'॥ 6॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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