श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  1.232.5 
कथमुड्डयनेऽशक्तान् पतने च ममात्मजान्।
संतप्यमाना बहुधा वाशमाना प्रधावती॥ ५॥
 
 
अनुवाद
‘मेरे बच्चे न उड़ पा रहे हैं, न पंख फड़फड़ा पा रहे हैं। उन्हें ऐसी अवस्था में देखकर जो दुःखी स्त्री बार-बार दौड़ रही है और चिल्ला रही है, उसकी क्या दशा होगी?॥5॥
 
‘My children are unable to fly or flap their wings. What will be the condition of the distressed woman who is running and screaming repeatedly after seeing them in that condition?॥ 5॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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