कथं त्वशक्ता त्राणाय माता तेषां तपस्विनी।
भविष्यति हि शोकार्ता पुत्रत्राणमपश्यती॥ ४॥
अनुवाद
'उनकी तपस्वी माता स्वयं असहाय है, वह उनकी रक्षा कैसे करेगी? अपने बालकों के उद्धार का कोई उपाय न देखकर, वह शोक से विह्वल हो जाएगी ॥4॥
'Their ascetic mother is herself helpless, how will she protect them? Seeing no way for her children to be saved, she will be overwhelmed with grief. ॥ 4॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥