Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.232.30: मैं अपने पुत्रों से मिलने आया हूँ, परन्तु तुम अब भी मेरे साथ तिरस्कार का व्यवहार कर रहे हो और जिस प्रकार अपनी इच्छित वस्तु पाकर भी तुम मेरे साथ संदेह का व्यवहार कर रहे हो, उसी प्रकार लपिता भी तुम्हारे साथ वैसा ही व्यवहार कर रही है ॥30॥ | mahabharat अध्याय 1.232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
अपत्यहेतो: सम्प्राप्तं तथा त्वमपि मामिह।
इष्टमेवं गते हि त्वं सा तथैवाद्य वर्तते॥ ३०॥
अनुवाद
मैं अपने पुत्रों से मिलने आया हूँ, परन्तु तुम अब भी मेरे साथ तिरस्कार का व्यवहार कर रहे हो और जिस प्रकार अपनी इच्छित वस्तु पाकर भी तुम मेरे साथ संदेह का व्यवहार कर रहे हो, उसी प्रकार लपिता भी तुम्हारे साथ वैसा ही व्यवहार कर रही है ॥30॥
I have come to meet my sons, but you still treat me with disdain, and just as you treat me with suspicion after having obtained what you desired, Lapita also treats you in the same manner. ॥ 30॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥