श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना  »  श्लोक 26
 
 
श्लोक  1.232.26 
मन्दपाल उवाच
न स्त्रीणां विद्यते किंचिदमुत्र पुरुषान्तरात्।
सापत्नकमृते लोके नान्यदर्थविनाशनम्॥ २६॥
 
 
अनुवाद
मण्डपाल ने कहा : परलोक में परपुरुषों के साथ सम्बन्ध और अपने पतियों के प्रति ईर्ष्या के अतिरिक्त और कोई दोष नहीं है जो स्त्रियों के आध्यात्मिक कल्याण को नष्ट कर सके ॥26॥
 
Mandpala said: In the next world, there is no other fault which can destroy the spiritual welfare of women except relations with other men and jealousy towards their spouses. ॥26॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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