श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  1.232.14 
मन्दपाल उवाच
नाहमेवं चरे लोके यथा त्वमभिमन्यसे।
अपत्यहेतोर्विचरे तच्च कृच्छ्रगतं मम॥ १४॥
 
 
अनुवाद
मंडपाल बोला - अरे ! मैं इस संसार में उस प्रकार नहीं घूमता जैसा तुम सोचते हो । मैं तो केवल अपने बच्चों के लिए घूमता हूँ । मेरे वे बच्चे संकट में हैं ॥ 14॥
 
Mandpal said - Oh! I do not roam in this world in the way you think. I roam only for my children. Those children of mine are in trouble.॥ 14॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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