श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.232.13 
गच्छ त्वं जरितामेव यदर्थं परितप्यसे।
चरिष्याम्यहमप्येका यथा कुपुरुषाश्रिता॥ १३॥
 
 
अनुवाद
‘अतः अब तुम उस स्त्री के पास जाओ जिसके लिए तुम इतने व्याकुल हो। मैं भी दुष्ट पुरुष के आश्रय में रहने वाली स्त्री की भाँति अकेला ही विचरण करूँगा।’॥13॥
 
‘So now you go to that woman for whom you are so upset. I too will wander alone like a woman who is under the protection of an evil man.’॥ 13॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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