Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.232.12: यह किसी भी प्रकार उचित नहीं कहा जा सकता कि जो शक्तिशाली है और जिसके बहुत से सहायक हैं, वह मेरे जैसे मित्र पर स्नेह न करे और अपने स्वजनों को संकट में देखकर उनकी उपेक्षा करे ॥12॥ | mahabharat अध्याय 1.232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न हि पक्षवता न्याय्यं नि:स्नेहेन सुहृज्जने।
पीडॺमान उपद्रष्टुं शक्तेनात्मा कथंचन॥ १२॥
अनुवाद
यह किसी भी प्रकार उचित नहीं कहा जा सकता कि जो शक्तिशाली है और जिसके बहुत से सहायक हैं, वह मेरे जैसे मित्र पर स्नेह न करे और अपने स्वजनों को संकट में देखकर उनकी उपेक्षा करे ॥12॥
It cannot be said to be justified in any way that one who is powerful and has many helpers does not show affection to a friend like me and ignores his own close ones when he sees them in distress. ॥12॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥