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mahabharat 1.232.11: "तुम मेरी शत्रु, मेरी सहधर्मिणी के विषय में चिन्ता करते हुए व्याकुल हो रहे हो। निश्चय ही तुम मुझ पर वैसा स्नेह नहीं रखते जैसा मेरी पहली पत्नी पर रखते थे॥ 11॥   |   mahabharat अध्याय 1.232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 232: मन्दपालका अपने बाल-बच्चोंसे मिलना  »  श्लोक 11
 
 
श्लोक  1.232.11 
तामेव तु ममामित्रां चिन्तयन् परितप्यसे।
ध्रुवं मयि न ते स्नेहो यथा तस्यां पुराभवत्॥ ११॥
 
 
अनुवाद
"तुम मेरी शत्रु, मेरी सहधर्मिणी के विषय में चिन्ता करते हुए व्याकुल हो रहे हो। निश्चय ही तुम मुझ पर वैसा स्नेह नहीं रखते जैसा मेरी पहली पत्नी पर रखते थे॥ 11॥
 
"You are getting upset worrying about my enemy, my co-wife. You certainly don't have the same affection for me as you had for my first wife.॥ 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)