Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.231.9: सरिसृक ने कहा- हे धूम्रवर्ण ध्वजा से विभूषित अग्निदेव! हमारी माता चली गई है, हमें अपने पिता का पता नहीं है और अभी हमारे पंख भी नहीं निकले हैं। आपके अतिरिक्त हमारा कोई रक्षक नहीं है; अतः आप ही हम बालकों की रक्षा करें॥ 9॥ | mahabharat अध्याय 1.231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
सारिसृक्क उवाच
माता प्रणष्टा पितरं न विद्म:
पक्षा जाता नैव नो धूमकेतो।
न नस्त्राता विद्यते वै त्वदन्य-
स्तस्मादस्मांस्त्राहि बालांस्त्वमग्ने॥ ९॥
अनुवाद
सरिसृक ने कहा- हे धूम्रवर्ण ध्वजा से विभूषित अग्निदेव! हमारी माता चली गई है, हमें अपने पिता का पता नहीं है और अभी हमारे पंख भी नहीं निकले हैं। आपके अतिरिक्त हमारा कोई रक्षक नहीं है; अतः आप ही हम बालकों की रक्षा करें॥ 9॥
Sārisṛkk said— O Agnidev adorned with a smoke-coloured flag! Our mother is gone, we do not know about our father and we have not even grown wings yet. We have no other protector except you; hence you only should protect us children.॥ 9॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥