श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.231.8 
ऊर्ध्वं चाधश्च सर्पन्ति पृष्ठत: पार्श्वतस्तथा।
अर्चिषस्ते महावीर्य रश्मय: सवितुर्यथा॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महावीर! आपकी ज्वालाएँ सूर्य की किरणों के समान ऊपर-नीचे, आगे-पीछे तथा चारों ओर फैल रही हैं।॥8॥
 
Mahaveerya! Your flames are spreading like the rays of the sun, up and down, forward and backward and all around. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)