श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  1.231.7 
जरितारिरुवाच
आत्मासि वायोर्ज्वलन शरीरमसि वीरुधाम्।
योनिरापश्च ते शुक्रं योनिस्त्वमसि चाम्भस:॥ ७॥
 
 
अनुवाद
जरीतारि बोले - अग्निदेव! आप वायु के आत्मरूप और वनस्पतियों के शरीर हैं। तृण, लता आदि की योनियाँ, पृथ्वी और जल आपके वीर्य हैं, जल की योनि भी आप ही हैं। 7॥
 
Zaritari said – Agnidev! You are the self-form of air and the body of plants. The vagina of grass, creeper etc., earth and water are your semen, you are also the vagina of water. 7॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)