श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  1.231.4 
स्तम्बमित्र उवाच
ज्येष्ठस्तातो भवति वै ज्येष्ठो मुञ्चति कृच्छ्रत:।
ज्येष्ठश्चेन्न प्रजानाति कनीयान् किं करिष्यति॥ ४॥
 
 
अनुवाद
स्तम्भमित्र बोले—बड़ा भाई पिता के समान होता है। बड़ा भाई ही छोटे भाई को संकटों से बचाता है। यदि बड़ा भाई आने वाले संकट और उससे बचने के उपाय को न जानता हो, तो छोटा भाई क्या करेगा?॥4॥
 
Stambamitra said—The elder brother is like a father, it is the elder brother who rescues the younger brother from troubles. If the elder brother does not know the impending danger and the means to escape from it, what will the younger brother do?॥ 4॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)