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mahabharat 1.231.3: सरिसृक्का ने कहा, "भाई! आप धैर्यवान और बुद्धिमान हैं और यह हमारे प्राणों के लिए संकट का समय है (अतः इससे आप ही हमें बचा सकते हैं); क्योंकि बहुतों में एक ही बुद्धिमान और वीर होता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।"   |   mahabharat अध्याय 1.231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 3
 
 
श्लोक  1.231.3 
सारिसृक्‍क उवाच
धीरस्त्वमसि मेधावी प्राणकृच्छ्रमिदं च न:।
प्राज्ञ: शूरो बहूनां हि भवत्येको न संशय:॥ ३॥
 
 
अनुवाद
सरिसृक्का ने कहा, "भाई! आप धैर्यवान और बुद्धिमान हैं और यह हमारे प्राणों के लिए संकट का समय है (अतः इससे आप ही हमें बचा सकते हैं); क्योंकि बहुतों में एक ही बुद्धिमान और वीर होता है, इसमें कोई संदेह नहीं है।"
 
Sārisṛkkā said, "Brother! You are patient and wise and this is a time of danger to our lives (so only you can save us from this); because among many there is only one wise and brave person, there is no doubt about this." 3.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)