Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.231.25: वैशम्पायन कहते हैं: हे जनमेजय! शारंगों की अनुमति से अग्निदेव ने वैसा ही किया और प्रज्वलित होकर उन्होंने सम्पूर्ण खाण्डव वन को जलाना आरम्भ कर दिया। | mahabharat अध्याय 1.231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वैशम्पायन कहते हैं: हे जनमेजय! शारंगों की अनुमति से अग्निदेव ने वैसा ही किया और प्रज्वलित होकर उन्होंने सम्पूर्ण खाण्डव वन को जलाना आरम्भ कर दिया।
Vaishmpayana says: O Janamejaya, with the permission of the Sharangas, Agnidev did the same and becoming ignited, he began burning the entire Khandava forest.
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि मयदर्शनपर्वणि शार्ङ्गकोपाख्याने एकत्रिंशदधिकद्विशततमोऽध्याय:॥ २३१॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत मयदर्शनपर्वमें शार्ङ्गकोपाख्यानविषयक दो सौ इकतीसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३१॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥