श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  1.231.24 
द्रोण उवाच
इमे मार्जारका: शुक्र नित्यमुद्वेजयन्ति न:।
एतान् कुरुष्व दग्धांस्त्वं हुताशन सबान्धवान्॥ २४॥
 
 
अनुवाद
द्रोण बोले- शुक्ल के समान अग्नि! ये बिल्लियाँ हमें प्रतिदिन कष्ट देती रहती हैं। हुताशन! तुम इन्हें इनके बन्धुओं सहित भस्म कर दो॥24॥
 
Drona said- Fire like Shukla! These cats keep troubling us every day. Hutashan! You incinerate them along with their relatives. 24॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)