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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  1.231.22 
मन्दपालेन वै यूयं मम पूर्वं निवेदिता:।
वर्जये: पुत्रकान् मह्यं दहन् दावमिति स्म ह॥ २२॥
 
 
अनुवाद
ऋषि मण्डपाल ने आप सबके विषय में मुझसे पहले ही अनुरोध किया था कि 'कृपया खाण्डव वन को जलाते समय मेरे पुत्रों की रक्षा करें।'
 
The sage Mandapala had already requested me about you all that 'Please save my sons while burning the Khandava forest.'
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)