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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.231.21 
अग्निरुवाच
ऋषिर्द्रोणस्त्वमसि वै ब्रह्म तद् व्याहृतं त्वया।
ईप्सितं ते करिष्यामि न च ते विद्यते भयम्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
अग्नि ने कहा - ऐसा प्रतीत होता है कि आप ऋषि द्रोण हैं, क्योंकि आपने उसी ब्रह्म का प्रतिपादन किया है। मैं आपकी इच्छा पूर्ण करूँगा, आपको कोई भय नहीं है।
 
Agni said - It seems that you are sage Drona, because you have propounded the same Brahma. I will fulfill your desire, you have no fear.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)