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mahabharat 1.231.13: आप अग्नि हैं, आप हवि को धारण करने वाले हैं और आप ही सर्वश्रेष्ठ हवि हैं। बुद्धिमान पुरुष आपको अनेक और एक जानते हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.231.13 
त्वमग्निर्हव्यवाहस्त्वं त्वमेव परमं हवि:।
मनीषिणस्त्वां जानन्ति बहुधा चैकधापि च॥ १३॥
 
 
अनुवाद
आप अग्नि हैं, आप हवि को धारण करने वाले हैं और आप ही सर्वश्रेष्ठ हवि हैं। बुद्धिमान पुरुष आपको अनेक और एक जानते हैं ॥13॥
 
You are the fire, you are the bearer of the oblations and you are the best oblation. The wise men know you to be many and one. ॥13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)