श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.231.12 
स्तम्बमित्र उवाच
सर्वमग्ने त्वमेवैकस्त्वयि सर्वमिदं जगत्।
त्वं धारयसि भूतानि भुवनं त्वं बिभर्षि च॥ १२॥
 
 
अनुवाद
स्तम्भमित्र बोले - हे अग्नि! आप ही सब कुछ हैं, यह सम्पूर्ण जगत् आपमें ही स्थित है। आप ही जीवों का पालन-पोषण करते हैं और जगत् का पालन करते हैं॥12॥
 
Stambamitra said - O Agni! You alone are everything, this whole universe is established in you. You alone nurture the living beings and sustain the universe.॥ 12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)