Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 1.231.11: जातवेद! आप ही सर्वत्र तप करते हैं। हे प्रभु! सूर्य की किरणों में तप करने वाला भी आपसे भिन्न नहीं है। हव्यवाहन! हम बाल ऋषि हैं; कृपया हमारी रक्षा करें। हमसे दूर चले जाएँ।॥11॥ | mahabharat अध्याय 1.231: शार्ङ्गकोंके स्तवनसे प्रसन्न होकर अग्निदेवका उन्हें अभय देना । mahabharat पर्व 1: आदि पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जातवेद! आप ही सर्वत्र तप करते हैं। हे प्रभु! सूर्य की किरणों में तप करने वाला भी आपसे भिन्न नहीं है। हव्यवाहन! हम बाल ऋषि हैं; कृपया हमारी रक्षा करें। हमसे दूर चले जाएँ।॥11॥
Jaatveda! You alone do penance everywhere. O Lord! Even the person who is penanced in the rays of the sun is not different from you. Havyavaahan! We are child sages; please protect us. Go away from us. ॥11॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥