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mahabharat 1.23.27: जब ऋषियों और देवताओं ने इस प्रकार उनकी स्तुति की, तब उत्तम पंखों वाले गरुड़ ने अपना तेज वापस ले लिया। 27.   |   mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति  »  श्लोक 27
 
 
श्लोक  1.23.27 
एवं स्तुत: सुपर्णस्तु देवै: सर्षिगणैस्तदा।
तेजस: प्रतिसंहारमात्मन: स चकार ह॥ २७॥
 
 
अनुवाद
जब ऋषियों और देवताओं ने इस प्रकार उनकी स्तुति की, तब उत्तम पंखों वाले गरुड़ ने अपना तेज वापस ले लिया। 27.
 
When the sages and the gods praised Him in this manner, Garuda with excellent wings withdrew his brilliance. 27.
 
इति श्रीमहाभारते आदिपर्वणि आस्तीकपर्वणि सौपर्णे त्रयोविंशोऽध्याय:॥ २३॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत आदिपर्वके अन्तर्गत आस्तीकपर्वमें गरुडचरित्रविषयक तेईसवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ २३॥

 
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)