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mahabharat 1.23.21: हे अग्नि के समान तेजस्वी देव! जिस प्रकार सूर्य क्रोधित होने पर सबको जला सकता है, उसी प्रकार आप भी क्रोधित होने पर समस्त लोकों को जला देते हैं। आप युगों के काल हैं और प्रलयकाल में सबका नाश करने के लिए संवर्त की भयंकर अग्नि के रूप में प्रकट होते हैं।   |   mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  1.23.21 
दिवाकर: परिकुपितो यथा दहेत्
प्रजास्तथा दहसि हुताशनप्रभ।
भयंकर: प्रलय इवाग्निरुत्थितो
विनाशयन् युगपरिवर्तनान्तकृत्॥ २१॥
 
 
अनुवाद
हे अग्नि के समान तेजस्वी देव! जिस प्रकार सूर्य क्रोधित होने पर सबको जला सकता है, उसी प्रकार आप भी क्रोधित होने पर समस्त लोकों को जला देते हैं। आप युगों के काल हैं और प्रलयकाल में सबका नाश करने के लिए संवर्त की भयंकर अग्नि के रूप में प्रकट होते हैं।
 
O God who shines like fire! Just as the Sun can burn everyone when it is angry, similarly when you are angry you burn all the people. You are the time of the time of the era and appear in the form of the terrible fire of Samvarta to destroy everyone during the time of doomsday.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)