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mahabharat 1.23.13: कश्यपनन्दन महाबली गरुड़ नागों का नाश करने वाले, देवताओं के हितैषी तथा दैत्यों एवं दानवों के शत्रु हैं ॥13॥   |   mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  1.23.13 
नागक्षयकरश्चैव काश्यपेयो महाबल:।
देवानां च हिते युक्तस्त्वहितो दैत्यरक्षसाम्॥ १३॥
 
 
अनुवाद
कश्यपनन्दन महाबली गरुड़ नागों का नाश करने वाले, देवताओं के हितैषी तथा दैत्यों एवं दानवों के शत्रु हैं ॥13॥
 
Kashyapanandan Mahabali Garuda is the destroyer of serpents, well-wisher of the gods and enemy of demons and demons. 13॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)