Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 1.23.12: विनता के आनन्द को बढ़ाने वाले ये अत्यंत तेजस्वी गरुड़ इसी रूप में उत्पन्न हुए हैं। इस तेजपुंज गरुड़ को देखकर आप लोग मोहित हो गए हैं ॥12॥   |   mahabharat अध्याय 1.23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 23: पराजित विनताका कद्रूकी दासी होना, गरुडकी उत्पत्ति तथा देवताओंद्वारा उनकी स्तुति  »  श्लोक 12
 
 
श्लोक  1.23.12 
जात: परमतेजस्वी विनतानन्दवर्धन:।
तेजोराशिमिमं दृष्ट्वा युष्मान् मोह: समाविशत्॥ १२॥
 
 
अनुवाद
विनता के आनन्द को बढ़ाने वाले ये अत्यंत तेजस्वी गरुड़ इसी रूप में उत्पन्न हुए हैं। इस तेजपुंज गरुड़ को देखकर आप लोग मोहित हो गए हैं ॥12॥
 
This extremely radiant Garuda, who increases the joy of Vinata, was born in this form. You people have been enchanted by seeing this Garuda who is a mass of brilliance. ॥12॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)