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mahabharat 1.229.9-10: पुत्रो! तुम्हारे क्रूर पिता ने पहले ही यह कहकर प्रस्थान किया था कि 'जरितरि सबसे बड़े हैं, अतः इस कुल की रक्षा का भार उन्हीं पर होगा। दूसरा पुत्र सारिसृक ही अपने पूर्वजों के कुल की वृद्धि करने वाला होगा। स्तम्भमित्र तपस्या करेगा और द्रोण ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ होंगे। 9-10॥   |   mahabharat अध्याय 1.229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 9-10
 
 
श्लोक  1.229.9-10 
जरितारौ कुलं ह्येतज्ज्येष्ठत्वेन प्रतिष्ठितम्।
सारिसृक्‍क: प्रजायेत पितॄणां कुलवर्धन:॥ ९॥
स्तम्बमित्रस्तप: कुर्याद् द्रोणो ब्रह्मविदां वर:।
इत्येवमुक्त्वा प्रययौ पिता वो निर्घृण: पुरा॥ १०॥
 
 
अनुवाद
पुत्रो! तुम्हारे क्रूर पिता ने पहले ही यह कहकर प्रस्थान किया था कि 'जरितरि सबसे बड़े हैं, अतः इस कुल की रक्षा का भार उन्हीं पर होगा। दूसरा पुत्र सारिसृक ही अपने पूर्वजों के कुल की वृद्धि करने वाला होगा। स्तम्भमित्र तपस्या करेगा और द्रोण ब्रह्मवेत्ताओं में श्रेष्ठ होंगे। 9-10॥
 
Sons! Your cruel father had already left saying that 'Jaritari is the eldest, hence the responsibility of protecting this clan will be on him. The second son, Saarisrik, will be the one who will increase the clan of his ancestors. Stambamitra will perform penance and Drona will be the best among the Brahma experts. 9-10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)