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mahabharat 1.229.8: मैं तुम सबको मुक्त करने का उपाय सोच रहा हूँ; परन्तु मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा। अच्छा, मैं तुम सबको अपने शरीर से ढक लूँगा और तुम्हारे साथ ही मर जाऊँगा। 8.   |   mahabharat अध्याय 1.229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  1.229.8 
चिन्तयाना विमोक्षं वो नाधिगच्छामि किंचन।
छादयिष्यामि वो गात्रै: करिष्ये मरणं सह॥ ८॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम सबको मुक्त करने का उपाय सोच रहा हूँ; परन्तु मुझे कुछ भी नहीं सूझ रहा। अच्छा, मैं तुम सबको अपने शरीर से ढक लूँगा और तुम्हारे साथ ही मर जाऊँगा। 8.
 
I am thinking of a way to free you all; but I am unable to think of anything. Well, I will cover you all with my body and I will die along with you. 8.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)