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mahabharat 1.229.6: मैं स्वयं भी उनके साथ इस अग्नि को पार नहीं कर पाऊँगा। मैं उन्हें छोड़ भी नहीं सकता। मेरे हृदय में उनके लिए बड़ी पीड़ा है ॥6॥   |   mahabharat अध्याय 1.229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  1.229.6 
आदाय च न शक्नोमि पुत्रांस्तरितुमात्मना।
न च त्यक्तुमहं शक्ता हृदयं दूयतीव मे॥ ६॥
 
 
अनुवाद
मैं स्वयं भी उनके साथ इस अग्नि को पार नहीं कर पाऊँगा। मैं उन्हें छोड़ भी नहीं सकता। मेरे हृदय में उनके लिए बड़ी पीड़ा है ॥6॥
 
I myself will not be able to cross this fire with them. I cannot even leave them. My heart is in great pain for them. ॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)