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mahabharat 1.229.20: हम लोग सोच रहे हैं कि ऐसा क्या किया जाए कि आग हमें जला न दे, चूहे हमें न मार डालें, हमारे पिता का संतान उत्पन्न करने का प्रयास व्यर्थ न जाए और हमारी माता भी जीवित रहे?॥20॥   |   mahabharat अध्याय 1.229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना   ।   mahabharat पर्व 1: आदि पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 20
 
 
श्लोक  1.229.20 
कथमग्निर्न नो धक्ष्येत् कथमाखुर्न नाशयेत्।
कथं न स्यात् पिता मोघ: कथं माता ध्रियेत न:॥ २०॥
 
 
अनुवाद
हम लोग सोच रहे हैं कि ऐसा क्या किया जाए कि आग हमें जला न दे, चूहे हमें न मार डालें, हमारे पिता का संतान उत्पन्न करने का प्रयास व्यर्थ न जाए और हमारी माता भी जीवित रहे?॥20॥
 
We are thinking about what can be done so that the fire does not burn us, the rats do not kill us, our father's efforts to produce offspring do not go in vain and our mother also remains alive?॥ 20॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)