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श्री महाभारत  »  पर्व 1: आदि पर्व  »  अध्याय 229: जरिताका अपने बच्चोंकी रक्षाके लिये चिन्तित होकर विलाप करना  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  1.229.2 
निशम्य पुत्रकान् बालान् माता तेषां तपस्विनी।
जरिता शोकदु:खार्ता विललाप सुदु:खिता॥ २॥
 
 
अनुवाद
यह जानकर कि वे बच्चे छोटे हैं, उनकी तपस्वी माता जरिता शोक और शोक से अभिभूत हो गयी और बड़े दुःख से विलाप करने लगी।
 
Knowing that those children were small, their ascetic mother Jarita was overwhelmed with grief and sorrow and began to lament in great sorrow.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)